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GIRNAR PARVAT KE BARE ME PURI JANKARI

GIRNAR PARVAT KE BARE ME PURI JANKARI , गिरनार पर्वत

गुजरात का सबसे बडा पर्वत गिरनार अपनी भव्यता के साथ साथ हिन्दू ओर जैन धर्म के मुख्य धार्मिक स्थानों में से भी एक है।गुजरात के जूनागढ़ जिल्ले में स्थित इस पर्वत के बारे में कहा जाता है की यह पर्वत हिमालय पर्वत से भी पुराना है , और इस पर्वत पर सभी देवी देवता ओ का वास होने का आध्यात्मिक मत्तव्य माना जाता है। इसके साथ ही जैन धर्म के बाईसवे तीर्थकर नेमिनाथ को यहा पर मोक्ष की प्राप्ति हुई थी इस लिए यह स्थान जैन सम्प्रदाय से जुड़े लोगों का भी एक अति महत्व का स्थान रहा है।



गिरनार पर्वत की भव्यता का ख्याल हमे यहा पर पहुचकर ही लगा सकते है , क्योकि यहा पर कई शिखर मौजूद है जिनमे से मुख्य शिखरों में शामिल है दत्तात्रेय शिखर , अम्बामाता शिखर , नेमिनाथ शिखर , गोरखनाथ शिखर ओर कालका शिखर ,जिनमे से दत्तात्रेय शिखर गुजरात का सबसे बड़ा शिखर है। गिरनार पर्वत के इस सबसे बडे ओर अंतिम शिखर तक पहुचने के लिए यहा पर 9999 सीढ़ियां बनाई गई है । जो इस विशाल पर्वत पर चढ़ने का काम आसान कर देती है। इन सीढ़ियों का निर्माण 1152 की साल में कुमारपाल ने करवाई थी , जो पत्थर से बनी है।

GIRNAR PAR KYA KYA DEKHE , गिरनार पर क्या क्या देखे ।

गुजरात का सबसे बड़ा पर्वत गिरनार अपनी भव्यता , तीर्थस्थानो , प्राकृतिक सौन्दर्यता के साथ साथ अति प्राचीन शिलालेखों ओर अडवेंचर के शौकीनों के लिए भी एक आकर्षण का केंद्र रहा है ।

गिरनार पर्वत पर बने मुख्य मंदिरो में जैन धर्म के तीर्थकर मल्लीनाथ ओर तीर्थकर नेमिनाथ का मंदिर मुख्य है । जिनका निर्माण कुमारपाल ओर वस्तुपाल ओर तेजपाल ने करवाया था । यहा के मंदिर संगेमरमर से बने हुए है जो इसको सूर्य की किरणें पड़ने पर बहुत ही आकर्षक और चमकदार बनाते है, जो इसकी शोभा को बढ़ा ते है । इसके अलावा यहा के अन्य मंदिरों में अंबामाता मंदिर , गोरखनाथ का मंदिर और दत्तात्रेयमन्दिर है , इस दत्तात्रेय मंदिर का निर्माण 2004 में किया गया है। इसके अलावा यहां पर गोमुखी, हनुमानधारा , ओर कमंडल नामके तीन कुंड मौजूद है ।

गिरनार पर्वत अपनी गगन चुम्बी शिखरों के साथ साथ इस पर्वत के आसपास फैले घने जंगलों के कारण इसके आसपास के क्षेत्र को गिर नेशनल पार्क के रूप में विकसाया गया है , जो एशियाटिक lione के लिए जाना जाता है । इस गिर नेशनल पार्क की एक ओर खास बात यह है की , पूरी दुनिया मे अब सिर्फ यही पर एशियाटिक शेर ( lione ) बचे हुए है । इस लिए यह नेशनल पार्क बहुत ही खास है । जहाँ पर आपको शेर खुले जंगलो में घूमते हुए नजर आए गे , जिनको देखने के लिए यहा पर सफारी के लिए गाड़ीया मौजूद की गई है।

GIRNAR KE SHILALEKH , गिरनार के शिलालेख ।

गिरनार में बने महान सम्राट अशोक , चंद्रगुप्त मौर्य ओर रुद्रदामा के शिलालेखों ने गिरनार पर्वत की विशेषता को भारत ही नही बल्कि पूरे विश्व मे ख्याति दिलाई है । यहा पर सम्राट अशोक के कुल 14 शिलालेख बने है , जो ब्राह्मी लिपि ओर पाली भाषा मे लिखे गए है । बाकी रुद्रदामा ओर चंद्रगुप्त मौर्य के शिलालेख ब्राह्मी लिपि ओर संस्कृत भाषा मे लिखे गए है । गिरनार पर्वत पर इन तीनो सम्राटो के अलावा एक शिलालेख स्कंदगुप्त के समय का भी मिला है ।

शिलालेखों के अलावा चंद्रगुप्त मौर्य के सूबा पुष्पगुप्त ने यहा पर सुदर्शन सरोवर का निर्माण करवाया था, जिसके बाद इसी सुदर्शन सरोवर से अशोक के सूबा तुसाच्य ने नहरों का निर्माण करवा कर सिंचाई की अच्छी सुविधाएं करवाई थी, ओर एक बार भारी अतिवृष्टि से इस सरोवर के तूट जाने पर स्कंदगुप्त के सूबा पर्णदत्त ने इस सरोवर का फिरसे निर्माण करवाया था ।

Girnar ka Bhavnath ka mela , गिरनार का भवनाथ का मेला ।

गिरनार में महाशिवरात्रि के दिनों लगने वाला यह मेला विश्वभर में प्रसिद्ध है । गिरनार की तलहटी जहा से गिरनार पर चढ़ने की शुरुआत होती है , वही पर महाशिवरात्रि के दिन से शुरू होकर पांच दिन तक चलने वाले इस मेले को देखने दुनिया भर से लोग आते है । क्योंकि महाशिवरात्रि के दिनों यहा पर स्थित मृगिकुण्ड में डुबकी लगाने के लिए जंगल मे रहनेवाले नागाबाबा पहुँचते है , जिनको सिर्फ महाशिवरात्रि के दिनों ही देखा जा शकता है । महाशिवरात्रि के दौरान इन नागाबाबा ओ के बारेमे ऐसा भी कहा जाता है , इनमे से कई बाबा डुबकी लगाने के बाद बाहर नही निकलते ।

GIRNAR PAR KAISE CHADE , गिरनार पर कैसे चढ़े ।

गिरनार गुजरात का सबसे बड़ा पर्वत होने के कारण इस पर चढ़ना बहुत ही कठिन है । इसके साथ ही गिरनार पर्वत के मुख्य शिखर तक पहुच ने के लिए अन्य चार शिखरों से होकर गुजरना पड़ता है । जो की यहा पर मुख्य शिखर तक पहुच ने के लिए 9999 सीढ़िया मौजूद है , फिरफी एक सामान्य मनुष्य को भी यहा तक पहुचने के लिए 4-5 घंटे का समय तो लगता ही है । रही बात बच्चे और बुजुर्गो की तो वह इसमें ज्यादा समय लगा सकते है।

गिरनार पर चढ़ने के लिए सुबह का समय ही चुने  यानी 5 या 6 बजे के आसपास क्योकि इस समय मे चढ़ाई करने पर शरीर मे ताजगी रहेगी नींद भी पूरी हो चुकी होगी और मॉर्निंग में ठंडी के साथ हवाए भी फ्रेश कर देती है । जिससे सफर रोमांचकारी लगेगा । सुबह में गिरनार पर्वत पर चढ़ने का एक ओर फायदा यह भी है कि यहा धूप तेज होने से पहले ही आप गिरनार के शिखर तक पहुच जाए गए , बाकी धूप ज्यादा होने पर काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है । और हा गिरनार पर्वत पर चढ़ते रास्ते से लकड़ी जरूर ले लेनी चाहिए क्योंकि रास्ते मे इसकी बहुत ही जरूरत पड़ती है । जो रास्ते मे दुकोनो में आसानी से 20 -30 rs में मिल जाती है ।

गिरनार पर्वत पर चढ़ने के लिए अगर कोई पैदल चड़ना अक्षम है तो उनके लिए यहा पर पालखी की शुविधा भी मौजूद है , जिसमे पहले तो उस व्यक्ति का वजन करके बाद में वजन के हिसाब से पैसे ले कर गिरनार पर्वत पर चढ़ाया जाता है ।
गिरनार पर्वत पर चढ़ने के लिए अभी रोप वे का काम भी अभी चल रहा है , जिससे अगले कुश सालो में इस पर्वत पर रोप वे की फैसिलिटी से जोड़ा जाएगा । जिससे इस पर्वत पर आसानी से चढ़ा जाए गा , ओर इस पर्वत की भव्यता ओर इसके आसपास फेला मनोहर प्राकृतिक सौन्दर्यता का भी नजारा देखने को मिलेगा ।

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