51 SHAKTI PITH ME PRATHM AMBAJI SHAKTI PITH , 51 शक्तिपीठ में प्रथम अंबाजी शक्तिपीठ
गुजरात मे मौजूद तीन शक्ति पीठो में से एक ओर साथ ही माता अंबाजी के 51 शक्तिपीठो में से प्रथम शक्तिपीठ के रूप में पूजा जाने वाला यह धार्मिक स्थल गुजरात के बनासकांठा जिल्ले में गुजरात और राजस्थान की सीमा पर मौजूद है । अंबाजी का यह धार्मिक स्थल अपनी धार्मिक गतिविधियों और आस्था के कारण हमेशा ही भक्तो के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है । यहा पर हर साल हजारों लोग माताजी के दर्शन हेतु आते है ।
गुजरात का विश्व प्रसिद्व नवरात्रि त्योहार भी माँ अम्बाजी को ही समर्पित है , जिसमे नवरात्रि के नोँ दिनों तक अंबाजी के अलग अलग रूपो की पूजा की जाती है । और साथ ही रात के समय गरबा ओर रास नृत्य करके नवरात्रि का आनंद लिया जाता है ।
AMBAJI SHAKTIPITH KE BARE ME , अम्बाजी शक्तिपीठ के बारे में
गुजरात के इस अंबाजी मंदिर का जीणोद्धार सन 1975 में किया गया था , अम्बाजी का यह मंदिर संगेमरमर के पत्थरों से भी जुसज्जित किया गया है , ओर इस मंदिर का मुख्य मुकुट 103 फ़ीट ऊंचा है , जिस पर 358 सुवर्ण कलश लगाए गए है , जो इस मंदिर को भव्यता के साथ साथ एक आकर्षक रूप भी प्रदान करते है ।
अम्बाजी के इस भव्य धार्मिक स्थल पर किसी मूर्ति की नही बल्कि यहा पर स्थित श्री यंत्र (हृदय) की पूजा अर्चना की जाती है ।अम्बाजी के इस शक्तिपीठ को 51 शक्तिपीठो में से प्रथम शक्तिपीठ माना जाता है , जिस वजह से इस मंदिर में हरदिन हजरों भक्तो की भीड़ को देखा जाता है ।
अम्बाजी के इस मंदिर से 3 किलोमीटर दूर एक गब्बर नामकी पहाड़ी है , जिस पर स्थित श्री यंत्र को ही मूल शक्तिपीठ के रूप में पूजा जाता है । गब्बर के इस पर्वत पर स्थापित की गई श्री यंत्र के दर्शन के बिना अम्बाजी की यात्रा अधूरी मानी जाती है । गब्बर का यह पर्वत पूरी तरह से बड़े बड़े से पत्थरो से बना है , जिस के ऊपर माताजी का एक छोटा सा मंदिर बनाया गया है , जिसमे श्री यंत्र को स्थापित कर उसकी पूजा की जाती है । गब्बर की इस पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर की एक ओर खास बात यह है , की इस मंदिर में जलाई जाने वाली ज्योत को 3 किलोमीटर दूर स्थित अंबाजी के मंदिर से भी देखा जा सकता है , क्योकि इन दोनों मंदिरो की वास्तुकला में भी कुछ इस तरह की तकनीक इस्तेमाल की गई है , की गब्बर पर्वत पर बनाया गया यह मंदिर भी ठीक इसकी सीधी दिशा में बनवाया गया है , जिससे गब्बर पर जलाया जाने वाली ज्योत को अम्बाजी मंदिर से भी देखा जा सके । यहा पर इस गब्बर पर्वत पर चढ़ने के लिए 999 सीढिया भी बनाई गई है । साथ ही इस पहाड़ी की चढ़ाई को आसान बनाने के लिए यहा पर रोप वे भी बनाया गया है ।
इस गब्बर की पहाड़ी पर चढ़ते वक्त यहा के अन्य दर्शनीय स्थानों को भी देखा जा सकता है , जिसमे गुफाए ओर माताजी का झूला मुख्य है ।
AMBAJI KAISE PAHUCHE , अंबाजी कैसे पहुचे ।
अंबाजी तक पहुचने के लिए गुजरात और राजस्थान दो नो ही जगहों से बस से भी आसानी से पहुचा जा शकता है । यह स्थल गुजरात के अहमदाबाद से 185 किलोमीटर की दूरी पर है , पर अहमदाबाद से डायरेक्ट अम्बाजी जाने की बसे उपलब्ध है , इसके अलावा राजस्थान से यहा तक पहुच ने के लिए माउंट आबू से 45 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है ।

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