HAMARI PRUTHVI KA JANM OR PRUTHVI PAR JIVAN KI SHURUAAT , हमारी पृथ्वी का जन्म और पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत ।
हमारे सौरमंडल का सबसे अनोखा ग्रह है हमारी पृथ्वी , जहा हर दम कुछ न कुछ घटता रहता है । यहा पर हर पल मौसम बदलता रहता है । कही पर तेज गर्मी है, तो कही पर कड़कड़ाती ठंडी , तो कही पर बारिश । ओर इन्ही बदलते मौसम की वजह से हमारी पृथ्वी का संतुलन बनाये रहता है। जो पृथ्वी पर मौजूद हरेक सजीव को जीवित रखने में अपनी भूमिका अदा करता है। यहा पर हर एक सजीव के लिए पर्याप्त मात्रा में वातावरण के साथ साथ पानी और सौर ऊर्जा होने की वजह से जीवन संभव हो पाया है। इसके अलावा यहा पर पानी अपने तीनो स्वरूपो में मौजूद है , महासागरों में पानी प्रवाही liqued , पृथ्वी के उत्तरीय ओर दक्षिणीय ध्रुव पर ओर कई ठंडे जगहों पर बर्फ के रूप में ओर वातावरण में बाष्प के रूप में है।
Photo credit pixabay.comहमारी पृथ्वी पर जीवन पनपने का मुख्य स्रोत पानी को ही माना जाता है । जो इस अद्भुत ग्रह को बाकी अन्य ग्रहों से अलग करता है । पर इसके बारे में बहुत ही विस्तार से सोचने पर कई तरह के सवाल हमे सोच मे डाल देते है , की आखिर पृथ्वी पर पानी कहा से आया ? हमारी धरती पर आखिर जीवन की शुरुआत कैसे हुई होगी ? पृथ्वी पर सबसे पहले कोनसे जीव आये होंगे ? पृथ्वी पर मनुष्य कहा से आये ? ओर इनके अलावा भी पृथ्वी की एक ओर खास बात है , जो इसे सौरमंडल के बाकी अन्य ग्रहों से अलग बनाती है , वह है यहा का तापमान जो यहा पर जीवन की शुरुआत होने में अहम भूमिका निभाता है। पर हमारी पृथ्वी पर सही तापमान का बनपाना कैसे संभव हुआ ? ओर इस तरह सवालो की एक हारमाला की शुरुआत होती है , जिनका एक सवाल का जवाब मिलते ही , एक ओर नया सवाल सामने आ जाता है । तो आज हम इन्ही में से कुछ सवालों के जवाब लाये है जो sience द्वारा किये गए रिसर्च और हमारी पृथ्वी से मिले पुराने अवशेषो ओर पृथ्वी पर किये गए बहुत सालो के अध्ययन द्वारा मीले है । ओर जैसा कि हम सब जानते है , की sience बिना कोई सबूत ओर अध्ययन के जवाब नही देता ।साइन्स किसी भी घटना के होने के पीछे कोई न कोई कारण जरूर रहा होगा यह मानता है , ओर उसका जवाब ढूढ़कर देता है । वह किसी चमत्कार को नही मानता ।
4.50 arab saal pahle ki hamari pruthvi , 4.50 अरब साल पहले हमारी पृथ्वी ।
लगभग साढ़े चार अरब साल पहले हमारी पृथ्वी सौर मंडल के बाकी अन्य ग्रहों के जैसी गर्म और लावा से धधगति हुई गोले के रूप में थी ।अगर आज के समय मे से उन समय मे जाना संभव होता तो इस पर हम बीना कोई स्पेससूट पहने उतर नही सकते थे । क्योंकि इस समय यहा पर कोई वातावरण मौजूद नही था । इस समय यहा पर उबलता हुआ लावा ओर गर्म गैसे ही थी , जहा किसीभी रूप में जीवन पनपने की संभावना नही थी।
DHARATI PAR JIVAN KI SHURUAAT HONE KE LIYE JIMMEDAR 6 MAHAPRALAY KARI GHATNAYE , धरती पर जीवन की शुरुआत होने के लिए जिम्मेदार 6 महाप्रलेयकारी घटनाएं।
【 1 】 प्रथम घटना :
6 महाप्रलयकारी घटना ओ में से इस प्रथम घटना के कारण ही हमारी धरती पर आज जीवन संभव हो पाया है । लगभग 5 अरब साल पहले जब गैस और धूल ग्रेविटी के कारण एकजुट होने लगी , इस घटना के कारण ज्यादातर गैस और धूल मध्य ( center ) में जमा होने लगी और जिसके कारण आज के सौर मंडल के सबसे बड़े तारे हमारे सूर्य का निर्माण हुआ । और बाकी बचे धूल और गैस भी आपस मे जुड़ कर हमारी पृथ्वी और अन्य ग्रहों का निर्माण हुआ । पर इन सब ग्रहों से अलग हमारी पृथ्वी का निर्माण ऐसे क्षेत्र में हुआ जहा सूर्य की गर्मी पर्याप्त मात्रा में थी , यहा ना तो ज्यादा मात्रा मे गर्मी थी नही कम जिसकी वजह से आज हमारी पृथ्वी पर पानी तरल अवस्था मे रह शकता है । ओर इस तरह हमारी पृथ्वी की सूर्य से सही क्षेत्र में जन्म लेने की घटना को धरती पर जीवन के शुरुआत होने के पीछे की पहली घटना मानी जा सकती है ।
【 2 】दूसरी घटना :
हमारी पृथ्वी के जन्म के बाद यहा पर जीवन की शुरुआत के लिए प्रथम घटना घटी जिसमे हमारी पृथ्वी ने सूर्यमंडल में अपना सही जगह बना ली जिससे की आगे जाकर यहा पर जीवन की शुरुआत के लिए सही मात्रा में गर्मी बनी रहे।
पर अभी भी लगभग साढ़े चार अरब साल पहले हमारी धरती गर्म लावे के रूप में थी , यह सौरमंडल के अन्य ग्रहों के जैसा ही एक सामान्य ग्रह था । पर समय के साथ साथ पृथ्वी का ऊपरी भाग ठंडा होते गया और पृथ्वी के बाहरी ठोस भाग का निर्माण हुआ । पर अब भी यहा पर किसी भी रूप में जीवन के पनपने की कोई संभवना नही थी । क्योकि किसी भी ग्रह पर जीवन के पनपने के लिए उस ग्रह के पास एक स्थिर ओर भरोसेमंद वातावरण की जरूरत होती है । जो पृथ्वी पर नही था । पर इस समय लगभग 4 अरब साल पहले दूसरी घटना हुई जिसमें एक मंगल ग्रह के आकार का एक बहुत ही विशाल बाहरी ग्रह पृथ्वी से आकर टकराया जिसकी वजह से पृथ्वी के बाहरी भाग में मौजूद हल्के पदार्थ पृथ्वी से बाहर निकलकर अंतरिक्ष मे चले गए और पृथ्वी की ग्रेविटी के कारण पृथ्वी के आसपास घूमने लगे । और बाद में समय के साथ साथ यह टुकड़े एक दूसरे से टकराकर जुड़ने लगे और इस तरह हमारे पृथ्वी के एक मात्र उपग्रह चाँद का निर्माण हुआ ।
हमारी पृथ्वी के चंद्रमा के होने की घटना भी धरती पर जीवन के शुरुआत होने में जिम्मेदार घटना ओ में से दूसरी घटना है । चंद्रमा का आकार भी बहुत विशाल होने के कारण इसकी ग्रेविटी भी बहुत ज्यादा है , जो हमारी पृथ्वी को अपनी ऑर्बिट से बाहर निकलने नही देती । इसके अलावा यह तो सभी जानते है कि हमारी पृथ्वी अपनी अक्षीस पर थोड़ी झुकी है , ओर पृथ्वी का अपनी अक्षीस पर यह झुकाव भी जरूरी है क्योंकि इन्हीं की वजह से धरती पर अलग अलग मौसम है और यह मौसम बदलते है। इसके साथ साथ पृथ्वी के घूमते समय भी चंद्रमा की वजह से पृथ्वी डगमगा नही जाती । जो पृथ्वी को स्थिरता प्रदान करता है । जो पृथ्वी पर सही वातावरण बनाने में अहम भूमिका निभाता है।
【 3 】 तीसरी घटना :
पृथ्वी के चंद्रमा का निर्माण होने के बाद भी हमारी पृथ्वी एकदम निर्जल ओर बिना वातावरण वाली थी । यहा पर अभी लावा से धधगते हुए ज्वालामुखी ओर बहुत ही गर्मी थी । जीवन के शुरुआत के लिए अभी भी यहा पर कोई संभवना नही थी । पर समय के साथ धरती ठंडी होती गई और धरती के बाहरी भाग ठंडा होने के कारण ठोस होता गया । जिससे पृथ्वी के बाहरी भाग का निर्माण हुआ । पर अब भी धरती पर जीवन की शुरुआत के लिए जिम्मेदार एक महत्व का तत्व पानी किसी भी रूप में यहा पर नही था।
पर पृथ्वी पर इस कमी को पूरा करने के लिए यहा पर फिरसे कई बाहरी अंतरिक्ष से अस्ट्रोरोइट्स ओर कॉमिट्स की बमबारी करोड़ो सालो तक चलती रही, जिसे लेट हेवी बम्बार मेट के नाम जे जाना जाता है , ओर इसी घटना को पृथ्वी पर जीवन पनपने के लिए जिम्मेदार उस तीसरी घटना के रूप में देखा जाता है , क्योकि करोड़ो सालो तक चलने वाले इस बम्बार मेट की वजह से ही पृथ्वी पर पानी पहुचा । क्योकि यह कॉमिट्स ओर अस्ट्रोरोइट्स अपने साथ पानी भी लाते है । ओर इस तरह करोड़ो सालो तक चलने वाले इस बम्बार मेट की वजह से पृथ्वी पर काफी मात्रा में पानी इक्कठा हो पाया जिनसे आगे जाकर बादल ओर महासागरों का निर्माण हुआ । ओर इस तरह पृथ्वी पर मौसम की शुरुआत हुई। पानी की बाष्प , नाइट्रोजन ओर कार्बन डाइऑक्साइड के मिश्रण ने धरती के वातावरण को रच दिया था । पर अब भी धरती पर किसी मनुष्य और जानवर के जीवन के लिए यहा कोई जीवन की संभावना नही थी । पर अब धरती पर सबसे बुनियादी घटक पानी मौजूद था , जो किसी एक कोशिय सजीव के पनपने के लिए काफी था। पर अब भी पृथ्वी पर ऑक्सीजन नही था । जिसके बिना धरती का विकाश सम्भव नही था।
【 4 】चौथी घटना :
पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत अब बेक्टेरिया के रूप में हो चुकी थी , ओर इन बेक्टेरिया ने पृथ्वी के वातावरण के हिसाब से अपने आप ढाल लिया था। जो इतनी गर्मी में भी आसानी से जीने में सक्षम हो गए थे। पर अभी भी यहा के वातावरण में मुख्यरूप से कार्बन डाइऑक्साइड ही थी जो पृथ्वी को अभी की तरह हरीभरी ओर ठोस जीवन की शुरुआत के लिए बिल्कुल भी तैयार नही थी। इसके लिए सबसे जरूरी ऑक्सीजन यहा पर नही थी , जिसके बिना पृथ्वी पर अभिकी तरह जीवन संभव नही हो पाता ।
समय के चलते पृथ्वी पर चौथी घटना बनी जिसमे बेक्टेरिया के कुछ समूह ने सूर्य के प्रकाश को ऊर्जा के रूप में बदलना शीख लिया । ओर बेक्टेरिया के इस सूर्य के प्रकाश को ऊर्जा के रूप में बदलने की प्रोसेस के कारण एक नई चीज का निर्माण हुआ हुआ जो आगे जाकर हमारे लिए बहुत फायदेमंद होनेवाला था , जो था ऑक्सीजन । फिरभी बेक्टेरिया का हर सदस्य काफी कम ऑक्सीजन बना पाता था , पर लंबे समय तक चलने वाली इस प्रक्रिया से ओर अरबो बेक्टेरिया की प्रजातियों ने हमारी पृथ्वी के वातावरण की ऑक्सीजन से खचाखच भर दिया था ।
【 5 】पांचवी घटना :
पृथ्वी पर एक ठोस जीवन की शुरुआत करने का अहम घटक ऑक्सीजन अब धरती पर मौजूद था । पर अब भी पृथ्वी पर जीवन समुद्र की गहराइयों में ही पनप रहा था । क्योंकि अभी भी सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणों की सीधी बोसार धरती की सतह पर हो रही थी , क्योकि अभी तक पृथ्वी को सूर्य की घातक अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाने वाली ओज़ोन लीयर का निर्माण नही हुआ था। जिसके बिना धरती की जमीन पर जीवन की शुरुआत हो पाना संभव नही था।
इस समय पृथ्वी पर ओज़ोन लीयर के बहुत ही कम मात्रा में थी जो सूर्य से आनेवाले घातक किरणों को रोक पाने में सक्षम नही थी , पर इन समय मे भी इस पांचवी घटना भी अपना काम कर रही थी । जिसकी वजह पृथ्वी पर अब कई ऑक्सीजन के साथ साथ कई गैस के रासायनिक प्रतिकिया के चलते पृथ्वी के आसपास ओज़ोन लीयर की परत अब मजबूत होने लगी । जिसकी वजह से अब धीरे धीरे पृथ्वी पर वातावरण में कई बदलाव आए , ओर अब समुद्र में भी कई तरह के जीव रहने लगे थे । और इन्ही समुद्र में रहने वाले जीवो में से कुछ सजीव धरती की सतह पर भी रहने लगे थे ।
【 6 】छट्ठी घटना :
आज से लगभग 15 करोड़ साल पहले अब धरती पूरी तरह से रहने लायक बन चुकी थी , ओर यहा पर अब डाइनोसॉर की कई प्रजातियांओ के साथ साथ कई सजीव रहने लगे थे। जिनको आज हम कुछ जगहों पर मील अवशेषो के रूप में देख सकते है । जैसे कि गुजरात के बलासीनोर में मीले डाइनोसॉर के अंडो ओर दुनिया भर के कई जगहों पर मिले डाइनोसॉर के अतिविशाल कंकालों से इसके बारेमे जानने को मिलता है ।
पृथ्वी अब पूरी तरह से फल फूल रही थी , यहा पर जीवन के लिए जरूरी पानी , जरूरी तापमान , संतुलित वातावरण यह सभी चीजें मौजूद थी , पर फिरभी यहा एक चीज की कमी थी वह थी इंसान । क्योकि इतने विशालकाल डाइनोसॉर के बीच अन्य सजीव का रह पाना सम्भव नही था। क्योंकि उस समय यहा पर डाइनोसॉर का राज हुआ करता था। पर फिर अचानक धरती से डाइनोसॉर का अंत हो गया , इसके लिए जिम्मेदार एक लगभग 10 किलोमीटर के आकार के अस्ट्रोरोइट्स का धरती से टकराना था। हालांकि यह अस्ट्रोरोइट् साइज में छोटा लगता है , पर यह धरती से इतनी जोर से टकराया था कि जिसकी वजह से पूरी धरती के हालात फिरसे नर्क के जैसे हो गए थे , जगह जगह पर जवालामुखी ओर आग की बोसार हुई , समुद्र में सुनामी आयी और धरती पर से लगभग 95℅ से ज्यादा जीवो का नाश हो गया ।
फलफूल रही धरती एक बार फिरसे बर्बाद हो गई थी , फिरभी इस घटना को उस छट्ठी भाग्यशाली घटना के रूप में देखा जाता है , जो धरती पर अन्य जीवो के पनपने के लिए जिम्मेदार रही है।क्योकि इस महाप्रलयकारी घटना के कारण ही आज इस धरती पर मनुष्य और अन्य जीवों का राज सम्भव हो पाया है । इस प्रलयकारी घटना के कारण धरती की सतह पर रहनेवाले सभी डाइनोसॉर जैसे बड़े जीवों का नाश हो गया , पर जमीन के अंदर रहने वाले कुछ स्तनधारी जीव इस विनाश से बच गए । डाइनोसॉर के अंत के कारण अब इन जीवों को विकशित होने का मौका मिला , ओर समय के साथ चलते इन जीवों ने धरती पर कई तरह के स्तनधारी जीवो के रूप में अपना रूप ले लिया । जिससे आगे जाकर पृथ्वी पर कई तरह की प्रजातियो के रूप में अपना विकाश किया और इन्ही प्रजातियों में से एक प्रजाति के रूप में आज हम मनुष्य इस धरती पर अपना अस्तित्व में आये है ।
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