MOST BEAUTIFUL PLACES IN GUJARAT , गुजरात मे घूमने लायक सबसे सुंदर जगह ।
गुजरात , ओद्यौगिक हब के नाम से जाने जला वाला यह भारत का एक ऐसा राज्य है जो भारत के टॉप विकासशील राज्यो में से भी एक है। समुद्र तट पर बसे होने के कारण और यहां की मौसमी आभोहवा के कारण आज यह राज्य बहुत ही आगे है । उसके अलावा यह राज्य अपने विकास के साथ साथ अपने टॉप travelling जगहों के लिए भी जाना हैं।यहां की सांस्कृतिक भिन्ननता और ऐतिहासिक जगह जो पुरी दुनिया को अपनी और खींचती है। ईसी वजह से यहा हर साल हजारो visitors आते है।
वेसे तो गुजरात के हर जिल्ले मे आपको बहूत सारे attractive जगह मिल जायेगीे , पर यहा पर मे आपको गुजरात के टॉप visited places के बारे मे बताउगा जो पूरी दुनिया के लोगो को यहां पर खींच लाती है।
स्टेच्यु ऑफ यूनिटी ( STATUE OF UNITY )
गुजरात के नमॅदा जिले के सरदार सरोवर बांध से 3.2 km की दूरी पर मोजुद यह स्मारक नमॅदा नदी के साधू बेट पर मोजुद है। statue of unity के नाम से जाने जाला वाला यह स्मारक हमारे देश के लौह पुरूष कहलाने वाले सरदार वल्लभभाइ पटेल की प्रतिमा है। जो की दुनिया की सबसे ऊॅची मूतिॅ है। जिसकी ऊचाई 182 मीटर है। ओर आधार सहित इस मुतिॅ की उॅचाई 240 मीटर है । जिसमे 58 मीटर का आधार है।
स्टेच्यु ऑफ यूनिटी के पास से 200 लोग एक साथ 500 फीट की ऊॅचाई से सातपुडा, विध्याचंल पवॅत श्रेणी ,सरदार सरोवर ओर गरूडेश्र्वर एक साथ देख सके उतनी जगह बनाई गई है। ओर 182 मीटर ऊॅची मूतिॅ मे 450 फीट की ऊॅचाइ पर प्रदशॅनी होल बनाया गया है , जहा पर सरदार पटेल के जीवन तथा उनके योगदानो को दशॉया गया है।
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स्टेच्यु ओफ यूनिटी का उदघाटन सरदार वल्लभभाइ पटेल की जन्म जयंती 31 अक्टुबर 2018 को भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कीया , ओर 1 नवम्बर 2018 से इसे आम जनता के लिये छोडा गया हे , ओर तब से यह स्थल लोगो का main attraction बना हुआ है।
गीर नेशनल पाकॅ ( Gir National park )
सासन-गीर के नाम से जाने जाला वाला यह स्थल वन्यजीव प्रेमीयो का मेंन attraction है। गीर नेशनल पाकॅ भारत के टॉप नेशनल पाकॅो मे से एक है, कयों की दुनिया मे एशियाई सिंह(शेर) केवल अब यही पर बचे है। यहा पर आप एशियाइ शेरो को खुले जगंलो मे घुमते हुए देखने के मझा ले पाएगे। विश्व मे शेरो की हो रही कमी की वजह से ओर एशियाई सिंह के रक्षण हेतु ईस इलाके को आरक्षित कीया गया है। आफ्रिका के बाद मे अब यही पर शेर बचें है। ओर इसी वजह से यहा हर साल पुरी दुनिया से हजारो लोग वाइल्ड लाइफ का मझा लेने आते है।
गीर नेशनल पाकॅ मे आप को सिंह के अलावा दूसरे वन्यजीव भी देखने को मिल जायेगें, जैसे के नीलगाय , हिरन, साबर , बारहसिगा , भालू ,जंगली बिल्ली ओर भी अन्य वन्यजीव मिल जायेगें। ओर इसके अलावा गीर यहा का एक पक्षी अभ्यारण भी है, यहा पर जंगली मैंना , बाज, पिपलीया, एरिओल ,रतनधुना जेसे कइ ओर भी पक्षी देखने को मिल जायेगें।
उष्ण ऋतु मे यहा का तापमान 43° सें. तक चला जाता है ,वही शीत ऋुतु मे यहा 10 ° तक चला जाता है। ओर वषॉऋतु मे यहा के आबोहवा मै भेज की मात्रा ज्यादा रहती है।
गीर नेशनल पाकॅ के रक्षण हेतु 16 जुन से 15 अक्टूबर तक यह पाकॅ हर साल बंन्द रहता है। जो की यहा पर बारीश का समय होता है। पाकॅ के visit का बेस्ट समय December से march हे जब यहा का मौंसम साफ रहता है।
कच्छ का रण ( The great rann of kutch )
कच्छ का यह रण कच्छ जिल्ले के उत्तर-पूवॅ मे स्थित हे। कच्छ का यह रण सफेद रेत ( white sand )के लिये पुरी दुनिया मे (white desert ) के नाम से भी जाना जाता है। कच्छ का यह रण नमकीन दलदलीय ईलाका हे जो की समुद्र का ही एक हिस्सा है। ग्रीष्म के समय यहा का पानी सुकने के कारण यहा पर नमक की परत चड जाती है। जीस पर सुयॅ का प्रकाश पडने पर यह चमकने लगता है, ओर यह सफेद दिखाई देता है। कच्छ का यह रण भारत का सबसे बडा white salty desert है।
कच्छ को देखने का बेस्ट समय नवम्बर से 20 फरवरी है , कयों की इस समय यहा पर गुजरात टुरिझम द्बारा रण उत्सव मनाया जाता है ,जिसे देखने के लिये पुरी दुनिया से लोग आते है। इस फेस्टिवल मे यहा की संस्कृती ओर यहा की प्राकृतीक सुदंरता को दिखाया जाता है , इस के साथ डान्स, music ओर भी बहूत कुछ आपको देखने को आपको मिलेगा।
कच्छ के इस सफेद रण (white desert) मे रण फेस्टीवल (Rann festival ) के दोरान फूल नाईट मून को देखना यहा की खास बात हे, क्यों की फूल नाईट मून की वजह से यह पुरा रेगिस्थान सफेद ( white ) दिखाई देता हे , जो यहा का मुख्य attraction है।
मरीन नेशनल पाकॅ ( Marin national park )
गुजरात के देवभुमि द्बारका जिल्ले मे स्थित यह भारत का एक मात्र समुद्रिय नेशनल पाकॅ है। यह पाकॅ देवभुमि द्वारका से जामनगर के समुद्रतट से कच्छ की खाडी तक फेला हुआ हे। यहा पर समुद्र के नीचे 700 से भी ज्यादा समुद्रजीवो की अलग अलग प्रजातिया पाइ गई हे ओर हर साल नयी नयी प्रजातीया खोजी जा रही है। यहा पर 42 टापु है। ओर उनमे से पिरोटन टापु प्रसिद्ब है।
यहा पर समुद्र के अदर रंग बे रंगीन मछलीया , कछूए , स्टार फीस , ओक्टोपस जेसे कई जीव यहा पर मोजूद है। यहा की खुबसूरती ओर कई दुलॅभ प्रजातीया के लिये यह स्थल विश्च विख्यात है।
रानी की वाव ( Rani ki vav )
गुजरात के पाटन जिल्ले मे स्थित यह वाव युनेस्को वल्डॅ हेरीटेज ( UNESCO WORLD HERITAGE ) द्बारा विश्व विरासत मे सामिल की गयी साइट है। ओर RBI द्बारा नये 100 के नोट पर भी इसे दशॉया गया है। इस वाव को भारत मे स्थित सभी वाव की रानी का खिताब से भी सम्मानीत किया गया
है।
यह वाव सोंलकी वंस के राजा भीमदेव प्रथम की रानी उदयमती ने बनवायी थी । यह वाव सोंलकी वंश की वास्तुकला का अजोड नमुना है। वाव के स्थंभो ओर दिवारो पर भगवान विश्णु के अलग अलग अवतारो को दशॉया गया है।
युनेस्को वल्डॅ हेरिटेज मे सामिल इस जगह को देखने पुरे विश्व से हर साल हजारो लोग यहा आते है।
मोढेरा का सूयॅ मंदिर ( Modhera sun temple )
मोढेरा का यह सूयॅ मंदिर गुजरात के महेसाणा जिल्ले के पुष्पावती नदी के किनारे स्थित है। , मोढेरा का यह मंदिर अद्भुत शिल्पकला के लिये पुरी दुनिया मे जाना जाता है। इस मंदिर की खास बात यह है , की इस मंदिर को बनाने मे कही भी चुने का इस्तमाल नही हुआ हे। ओर इस मंदिर की दुसरी खासीयत यह हे की सूयॉदय के समय सुरज की पहली किरन मंदिर के गभॅगृह को प्रकाशीत करती है।
ईरानी शैली मे बनवाई गइ इस मंदिर के निमॉण भीमदेव ने 1026-27 मे करवाया था । इस मंदिर के सभा गृह मे कुल 52 स्थभ हे , जीन पर रामायण ओर महाभारत के द्रशयो ओर देवी देवता के चित्रों को दशॉया गया है।
यह स्थल महेसाणा से 25 km. की दुरी पर ओर अहमदाबाद से 100 km. की दुरी पर है। महेसाणा ओर अहमदाबाद दोनो जगह से यहा जाने के लिये बस सैंवाए मोजुद है।
गिरनार पवॅत ( Girnar parvat )
गुजरात के जुनागढ जिल्ले मे आया हुआ यह पवॅत हिन्दु ओर जैन धमॅ का मुख्य तीथॅस्थल है। जो गुजरात का सबसे ऊंचा पवॅत है। जीसकी कुल ऊंचाई 1153 m. है। सम्राट अशोक का शिलालेख भी यही मोजुद है। एशियाइ शेरो के लिये जाने जाला वाला गीर नेशनल पाकॅ ईन्ही पवॅत के क्षेत्र मे स्थित है। धामिॅक ओर एतिहासीक स्थल के साथ इस पवॅत के चारो ओर फेला हुआ जंगल ओर नदीयॉ इस पवॅत की प्राकृतिक सुदरता को ओर बडाती है।
ईस विशाल पवॅत पर आप जैन धमॅ के पवित्र ओर भव्य विशाल मंदिरो ओर भव्य मूतिॅया ओर प्राचीन शिल्पकला का दशॅन कर शके गै। पर इस के लिये आपको 10000 सीढीयो को चडना पडेगा। जीहा गुजरात के सबसे ऊचे ईस पवॅत पर चडने के लिये 10000 सीढीया बनाई गइ है।
ईस पवॅत की भव्यता के साथ यहा की प्राकृतिक सुंदरता सुप्रसिद्व मंदिर ओर ईसके साथ साथ ईस पवॅत के चारो ओर फेली हुई प्राकृतीक सुंदरता को देखते हुए पवॅत पर चडना हर कीसी को पसंद आयेगा । ओर ईसी लिये यहा हर साल हजारो लोग आते है।
सापुतारा हिल स्टेशन ( Saputara hill station )
प्राकृतिक सुुंदरता से भरपुर गुजरात का यह एक मात्र हिल स्टेशन डांग जिल्ले मे स्थित है। यह हिल स्टेशन गुजरात ओर महाराष्ट के बीच है। यहा की प्राकृतिक सुंदरता हर किसीको अपनी ओर खीच लाती है। यहा पर आप यहा की प्राकृतीक सुंदरता के साथ रोप-वे ओर बोट कल्ब का का भी मझा ले सकते है। ईसके अलावा सनसेट पोईन्ट यहा का मुख्य attraction है।
वेसे तो गरमी के मौशम मे यहा लोग ज्यादा आना पसंद करते है। क्योकी गुजरात के बाकी जगहो की तुलना मे यहा गरमी कम पडती ओर ईस क्षेत्र मे जंगल भी बहुत ज्यादा है। जीसकी वजह से ईस हिलस्टेशन पर ठंडी हवाये चलती रहती है। ओर साथ मे बोटींग ओर रोप वे जेसी सुविधा के चलते यहा ज्यादा लोग आना पसंद करते है।
जुलाई से सप्टेम्बर यहा बारीश का समय होता है तब यह हिलस्टेशन यहा के घने जंगल के कारण पुरा हरा भरा ओर पुरा नीला हो जाता है। जो ईस हिल स्टेशन को ओर आकषिॅत बनाता है। तो अगर आप ईस हिलस्टेशन की Real प्राकृतिक सुंदरता को देखना चाहते है। तो ईस के लिये बेस्ट समय October से January है।
यह हिलस्टेशन गुजरात के सुरत 170 km. ओर महाराष्ट के नाशिक से करीब 80 km. कीदुरी पर है।
अंबाजी ( Ambaji )
माॉं भवानी के 51 शक्तिपीठो मे से एक ओर गुजरात के मुख्य धामिॅक स्थानो मे से एक यह स्थल साबरकाठा जिल्ले मे स्थित है । अंबाजी का यह धामिॅक स्थल गुजरात ओर भारत के साथ साथ विदेशो मे बसे माॅ दुगॉ के भक्तो के लिये भी एक महत्व पुणॅ स्थान है ।
अंबाजी के ईस धामिॅक यात्रा धाममे गुजरात के मुख्य त्योहार नवरात्री को बहुत ही धामधूम से मनाया जाता है । तब यहा पर बहोत ही भीङ रहती है। ओर गरबा खेलने के लिये यहा पर दुर दुर से लोग आते है । इसके अलावा यहा की सुदंरता , रोप वे , माताजी के झुले , सनसेट पोइन्ट भी लोगो को अपनी ओर आकषीत् करनेवाले है।
पावागढ Pavagadh
माताजी के प्रसिद्व शक्तीपीठो मे मे एक यह स्थल गुजरात के पंचमहाल जिल्ले मे स्थित हे । धामिॅक स्थल के साथ साथ यह स्थल बहूत ही सुंदर ओर चारो तरफ से खाइयॉ से घीरा हुआ हे , जो इसे ओर भी रोमाचंक बनाता है। चारो तरफ से पथ्थर से घीरे इस पहाड पर माताजी मूतिॅ हे जीसकी पुजा की जाती है। नवरात्री के समय यहा बहुत ही भीड रहती हे ओर तब यहा का दशॅन करना बहूत ही मंगलकारी माना जाता है।
द्वारका ( Dwarka )
द्वारका, भगवान श्री कृष्ण की बसायी हुई अपनी नगरी । हिन्दु धमॅ का यह पवित्र धाम हिन्दु धमॅ के मुख्य चार धामो ( बदरीनाथ, द्वारका, पुरी, रामेश्वरम ) मे से एक ओर सात नगरीओ( अयोध्या , मथूरा, मायापुरी, कासी, अवंती , द्वारमती, कांची) मे से एक है।
कहा जाता हे की भगवान श्री कृष्ण ने यही से पुरे भारत पर राज कीया था। ओर एक मान्यता मुजब भगवान श्री कृष्ण के जाने के बाद यह नगरी 6 (छ) बार अरब सागर मे डूब गई थी ओर अभी की जो नगरी है यह 7 (सात) वी नगरी है।
भारत के मुख्य यात्रा धामो मे से एक यह तीथॅस्थल गुजरात के देवभुमी द्वारका जिल्ले मे स्थित है।
सोमनाथ ( Somnath )
गुजरात के गीर सोमनाथ जिल्ले मे स्थित यह पवित्र धाम भगवान शिव के 12 ( बारह ) ज्योतिॅलीगो मे से एक है। ओर यह भगवान शिव का मुख्य स्थान भी है। यहा पर हिरण , कपिला ओर सरस्वती यह तीन नदीयॉ के संगम भी होता हे ओर त्रिवेणी सगंम मे नहाने के भी विशेष महत्व बताया गया है।
एक पौराणीक कथा अनुसार दक्ष राजा के श्राप के कारण चंद्रमा का तेज घटने लगा जीसकी वजह के चंद्रमा ने यही पर भगवान शिव की अचॅना की ओर अपने श्राप से मुक्त हुअे।
सोमनाथ का इतिहास देखे तो इसे इतिहास मे कइ बार कइ राजा ओ द्वारा तोडा गया है , लेकीन भगवान के भक्तो द्वारा इसे जीतनी बार तोडा गया उतनी बार फिरसे खडा किया गया है। आखरी बार इस मंदिर के पुनःनिमॉण भारत के लौहपुरूष कहलाने वाने सरदार वल्लभभाइ पटेल ने करवाया था।
पालिताणा के जैन मंदिर Palitana Jain Mandir
भावनगर जिल्ले मे स्थित यह तीथॅस्थल जैन धमॅ के मुख्य तीथॅस्थलो मे से एक है। जो शेत्र्रूजय पवॅत पर स्थित है। यहा पर 863 मंदिर मोजुद हे जो संगेमरमर से ओर प्लास्टर से बने है। जीन पर सूयॅ की किरने पडने पर वह चमक ने लगते है। जैन धमॅ के ईस तीॅथॅस्थल का धामिॅक महत्व भी बहुत है। यहा पर जैन धमॅ के पहले तीथॅकर भगवान ऋषभदेव का मंदिर बहूत ही आकॅषक है । पालिताना के यह मंदिर अपनी सोदयॅता , नकसीकला ओर मूतिॅकला के लिये दुनियाभर मे जाने जाते है।
नल सरोवर ( Nal Sarovar )
गुजरात के अहमदाबाद से 60 km.की दुरी पर स्थित यह पक्षी अभयारण अलग अलग तरह के पक्षीओ के लिये भारत भर में जाना जाता हे। 120 वगॅ कीमी मे फेला यह अभ्यारण बहूत ही शांत ओर हर कीसी को आकषिॅत करने वाला हे। इस अभयारण की खास बात यह हे की यहा पर सदिॅयो के मौशम में दुनिया के अलग अलग देशो से यहा पक्षी आते है। यहा पर 200 से ज्यादा तरह के पक्षी देखने को मील जायेगें। यहा आने के लिये बेस्ट समय की बात करे तो नवम्बर से फरवरी के बीच यहा पर ज्यादा विदेशी पक्षी देखने को मिलते हे तो वह समय इस अभ्यारण को विझिट करने के लिये बेस्ट है।
दीव का किल्ला ( FORT OF DIU )
वैसे तो दीव अपने मनमोहक और सुंदर बीच के लिए जाना जाता है, पर इसके अलावा भी यहा पर कई ऐसी जगह है जो हर किसीको यहा खींचलाती है, और उन्ही में से एक है दीव का यह विश्व विखयात किला । पुर्तगाली किला के नाम से जानेजाला वाला यह किला तीनो तरफ से अरब सागर से घिरा हुआ है जिसकी वजह से यहा का नज़ारा हर किसी को मोहित करने वाला लगता है । दीव के इस किले का निमॉण 1535 मे पुतॅगाली द्वारा किया गया था ।
ईसके अलावा यहा के बीच बहुत ही फेमस है तो खासकर यंगस्टर के यह जगह मौज मस्ती के लिये बेस्ट है ।और जो की यह एक केंद्र शाशित प्रदेश है तो यह पर गुजरात के कानून लागू नही होते है ।
सीदी सैय्यद मस्जिद ( Sidi saiyyed jali )
अहमदाबाद मे स्थित यह मस्जिद अपने अदभूत नक्शीकला के लिये दुनियाभर मे जाने जाती हे । 500 साल पुरानी इस मस्जिद मे 10 जालीदार पथ्थर से बनी खिडकीया है। जीन पर बहूत ही बेहतरीन तरीके से नकशीकाम कीया गया हे । इन नकशीकला ओ मे पैडो की शाखाओ को बहूत ही बारीकी के साथ बहूत ही सुंदर तरी के से तरासा गया हे , जी से हर कोइ देखते ही रह जाता है।
साबरमती आश्रम Sabarmati ashram
अहमदाबाद के साबरमती नदी के किनारे स्थित इस आश्रम की स्थापना हमारे देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी ने 1917 में की थी। यह आश्रम पहले सत्याग्रह आश्रम के नाम से जाना जाता था । पर बाद में इसे साबरमती आश्रम नाम दिया गया।
महात्मा गांधी के देहांत बाद इसे म्यूजियम में बदला गया है जो अब महात्मा गांधी स्मारक सग्रहालय के नाम से भी जाना जाता है । यहा पर गांधीजी के जीवन सम्बंदित सभी चीजो को रखा गया है । यहा पर गांधीजी के निवास स्थान को हदयकुंज के नाम से जाना जाता है ।
गांधीजी के साथ जुड़े इस स्थान को देखने हर साल 8 लाख से भी ज्यादा लोग यहा पर आते है।
लोथल Lothal
अगर आप सिंधु घाटी सभ्यता से जुडी जगहो को देखना पसंद करते हे तो लोथल भी उन्ही मे से एक बहुत ही प्रख्यात जगह है। यहा पर सिंधु घाटी के अवशेषो को खुदाइ कर के नीकाला गया है। लगभग 2400 साल से भी ज्यादा पुरानी इस सभ्यता के अवशेसो को आज भी आप यहा देख शको गे। हजारो साल पुरानी यह सभ्यता कितनी आगे थी यह तो आप इसे देखकर ही जान पाओगे ।
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