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MOST BEAUTIFUL PLACES IN MAHARASTRA

MOST BEAUTIFUL PLACES IN MAHARASTRA , महाराष्ट्र में घूमने लायक खूबसूरत जगह           


 महाराष्ट्र अपने पहाडीयॉ के बीच  मे से गुजरने वाले घाटीले रास्तो ओर हर कीसी का मन मोहने वाली यहा की प्राकृतिक सुंदरता , ऊची चोंटीया के साथ साथ अजंता - एलोरा जेसी विश्व प्रसिद्व धरोहरो ओर झीलो एवंम रमणीय हिलस्टेशनस, बहूत सारे हिस्टोरीकल प्लेसीस के लिये विश्व विख्यात है ।

              Photo credit pixabay.com


 अजंता की गुफाए  ( Caves of ajanta )


महाराष्ट्र राज्य के औरंगाबाद शहर से करीब 101 km. की दुरी पर स्थित यह गुफाये  प्रारंभीक  बौद्व वास्तुकला , चित्रकला  ओर शिल्पकला की  विश्व विख्यात धरोहर है। यह गुफाये शिलाखंडो को तराश कर एक विशालकाय घाटी के मागॅ मे  यु ( U ) आकार मे बनाई गई है। यह गुफाये घाटी के 660 m. के एरिया मे फेली  हुई है। यहा पर कुल 26 गुफाओ आप देख शके गे। अजंता की गुफाओ मे केवल बौद्व गुफाए ही है। ईस गुफाओ के दीवारो तथा भीतरी छतो पर भगवान बुद्व के जीवन की घटना ओ को तथा बौद्व घमॅ के चित्रो को बहुत ही सुंदरता से तरासा गया है।

          Photo credit pixabay.com

             
यहा की गुफाओ मे तरासी गई अजोड शिल्पकला , मनोहर नक्शीकाम , जातक कथाअों,  एवंम ईस घाटी की प्राकृतिक सुंदरता हर किसी को अपनी ओर आकषिॅत करती है। ओर ईसी वजह से  यह गुफाए विश्व विख्यात है। जो पुरी दुनिया को अपनी ओर अाकषित करती है।ओर ईसी लिये  हर साल यहा पुरी दुनिया से हजारो लोग ईस विश्व विख्यात धरोहर को देखने आते है।
   
अजंता की गुफाए सोमवार के बंद रहती है।
       
एलोरा की गुफाए (  Caves of Ellora  )


विश्व प्रसिद्व  धरोहर मे से एक एलोरा की यह गुफाये औरंगाबाद जिल्ले से 26 km. की  दुरी पर है। एलोरा की यह गुफायें पहाडीयो की वादीयो में अजंता की गुफाओ की तरह ही पथ्थर के चट्टानो को तराश कर बनाइ गइ है।  एलोरा की यह गुफाए हिन्दु , बौद्व ओर जैन धमॅ का पवित्र स्थल भी है। एलोरा की यह गुफाए भारतीय शिल्पकला का अजोड़् नमूना है। इन गुफाओ मे हिन्दु , बौद्व ओर जैन धमॅ के चित्रो बहुत ही बेहतरीन कारीगरी से तरासा गया है।
            
एलोरा की ईन्ही गुफाओ मे विश्व की सबसे बडी गुफा " कैलाश मंदिर " गुफा नं. 16 मे स्थित है।
          
         
अजंता की गुफाओ की तरह ही एलोरा की यह गुफाये अजोड प्राचीन शिल्पकला , शिलालेख , एतिहासीक ओर धामीॅक परंपरा , वास्तुकला के लिये विश्व प्रसिद्व धरोहर मे से एक है । जो पुरी दुनिया को अपनी ओर खीच लाती है। जीस्से हर साल यहा हजारो लोग विदेशो से ईस धरोहर को देखने पहुॅच जाते है।

एलोरा की गुफाए मंगलवार को बंद रहती है।

दौलताबाद का किला ( Dualatabad fort )


औरंगाबाद से 17 km.  दुरी पर  स्थित ईस किल्ले की कोई जोड नही है। चट्टानो के ऊपर बनाया गया यह किल्ला अंत्यत रोंमाचकारी सफर से भरा पडा है। 200 m उंचे ईस  किल्ले के मुख्य किल्ले तक पहुचने के लिये तीन अभेद दीवार , बीच मे अधेरे मे तैंडा मेंडा रास्ते से लेकर एक जलाशय जिस पर एक लोहे का   पुल बना है जीस पर से केवल दो लोग ही जा सके उतनी ही जगा बनाई गई है।
     

रोंमाचक सफर से भरे  ईस किल्ले के चारो ओर खाईया है। जहा से ईस किल्ले के चारो ओर का  नजारा ओर भी रोंमाचक ओर हर किसी का मन लुभानेवाला लगता है।

प्राचीन वास्तुकला ओर प्राकृतिक सौंदयॅ से भरा पडा यह किल्ला राज्य के टॉप 10 एतिहासीक  जगहो मे से एक है। जो हर किसीको यहा खीच लाता है।

महाबलेश्वर (  Mahableshwar )



महाराष्ट्र के सबसे लोकप्रिय स्थलो मे से एक महाबलेश्वर एक पवॅतीय स्थल है। यहा की रोंमाचक घाटीयाॅ , ऊची-ऊची चोटीया , ठंन्डी हवायें ओर चारो ओर फेली हुई हरयाली के बीच मे से रास्ते से गुजरते हुए इस पहाडी पर चडना हर कीसी को स्वप्न मग्न कर देती है। यहा पर जाने के लिये बस के बजाये अपनी कार या बाईक (bike) पर से गुजरते हुए घाटियों के बीच से यहा की प्राकृतिक सुदरता  को देखना हर किसी को मनमोहीत कर सकता है। ओर इस के साथ यहा के बाकी नजदीकी अन्य स्थल भी आप को देखने का  मोका मिल जायेगा ।

महाबलेश्वर एक बहूत ही सुंदर प्राकृतिक पवॅतीय स्थल के साथ साथ एक प्रसिद्व दशॅनीय स्थन भी हे ओर इसका एक अलग ही महत्व हे । यहा पर महाबलेश्वर के एक सुप्रसिद्व मंदिर भी है।

लोनावाला  ( Lonawala )

लोनावाला महाराष्ट्र के  फेमस हिल स्टेशनो मे से एक बहूत ही खुबसुरत जगह  है। यहा पर बहोत सारी झीले हे जीस की वजह से इसे झीलो का जिल्ला भी कहते है। बारीस के समय बारीस की वजह से चारो ओर हरयाली छा जाती हे ओर सभी झीले पानी से भरजाती है तब यहा का नजारा हर कीसी को मन मोहित कर देने वाला होता है। यहा प्राकृतिक सुंदरता के कारण ही ईसे सह्यादि पहाडियॉ के मणी भी कहते है।

इस के अलावा यहा आस पास कई किले भी है जीन मे से तुंग किला , लोहगढ मुख्य  हे जो भी यहा आनेवाले लोगो को अपनी ओर आकॅषिॅत करते है।
            
 एलिफंटा की गुफाए  ( Caves of Elephanta )

मुबई के दक्षिणी भाग मे स्थित एलिफंटा की यह गुफाएॅ  गेट वे ओफ इन्डिया से करीब 10 km दुर समुद्र मे एक द्वीप पर है , इन गुफाओ   को एक बडे पथ्थर को तराश कर बनाइ गइ हे , इन गुफाओ मे बहूत ही सुंदर तरी के से तरासी गइ मूतिॅया मोजुद है। जो प्राचीन शिल्प कला का अजोड नमुना है। इस के साथ  चारोओर फेली हुइ हरयाली के साथ साथ टंडी हवायें  मन को ताजगी के भर देती हे । 
            
              
एलिफंटा की यह गुफाए युनेस्को (UNESCO) द्वारा विश्व  विरासत मे सामील की गइ साइट है।
एलिफंटा की यह गुफाए सोमवार को बंद रहती है।

खंडाला   ( Khandala  )    

                 
महाराष्ट्र का एक छोटा सा लेकीन महाराष्ट्र के टॉप खुबसुरत जगहो मे से एक हे यह हिल स्टेशन । यहा पर चारो तरफ फेली पहाडियॉ , हरयाली ओर साथ मे पहाडियॉ से गिरते हुए झरने हर कीसी को मनमग्न कर देते है। यहा का सौदयॅ पलभर मे आपकी थकान को दुर कर देगा ।

यहा पर आने के लिये बेस्ट समय की बात करे तो बारीश के बाद यहा की प्रकृति जेसे पुरी सजधज के बेठी हो एसा लगता हे , चारो तरफ सिफॅ हरयाली ही हरयाली , पहाडियॉ से गिरते हुए पानी से भरे झरने ओर उसकी मंद सुरीली आवाजें यहा की प्रकृति को पुरा भर देती है। जो हर कीसी को यहा खीच लानेवाली है।

पंचगनी हिल स्टेशन ( Punchgani hil station )

महाराष्ट्र का एक ओर सौदयॅ से भरपुर ओर हर किसी को मनमग्न कर देनेवाला यह हिलस्टेशन महाराष्ट्र के सतारा जिल्ले मे है। पंचगनी हिलस्टेशन का मौशम पुरे साल हरा भरा रहता हे इस लिये यह लोगो का एक मुख्य आकषण् रहा है। पंचगनी का यह हिल स्टेशन सह्यायाद्वी पवॅत श्रृखला के मध्य मे बसा हे जीसकी वजह से यहा के चारो तरफ के नजारा इतना सुंदर लगता हे की यहा से जाने को मन नही करता । इस के अलावा कृष्णा नदी इस के पास से ही गुजरती हे ओर उस पर एक बाध भी बनाया गया हे जीसका नजारा यहा के सीड़नी पोइन्ट से देखने पर बहोत ही सुंदर लगता हे जो यहा का मेंन attraction है।


पंचगनी का यह हिलस्टेशन अपने प्राकृतिक सौदयॅ के लिये जाना जाता हे , यहा के खुले मेदानो मे फेली हुइ हरयाली के साथ धुंए की तरह फेले हुए यहा के बादल जो हर किसी को यहा पर खीचलेने वाले है। यहा की सौदयॅता के कारण ही यह जगह फिल्म सूटींग के लिये बेस्ट जानी जाती है। यहा पर जाने के लिये बेस्ट समय की बात करे तो अक्टूबर से फरवरी हे जब यहा का मौसम भी ठंडा रहता हे ओर यह पुरा हरा भरा ओर बहूत की सुंदर लगता है।

मालशेज घाट ( Malshej ghat )


महाराष्ट्र के पुणे जिल्लेे मे स्थित यह घाट भारत के टॉप मोनसून डेस्टिनेशनो मे से एक हे ,  ओर इस के सौदयॅ की बात करे तो उसकी तो कल्पना भी नही की जा सकत्ती , जी से तो आप यहा जा कर ही जान सकते हे। बारीश के मौशम दोरान यहा के घाटीले रास्तो के पहाडी से गिरते हुए बहुत सारे झरने ओर चारो तरफ फेली हुइ सौदयॅता हर किसीको मोहित करनेवाली है । यहा के रास्तो पर चलते आप जेसे बादलो के  उपर चल रहे हो एसी फिलींग ( feeling ) महसुश करोगे , बारीश के मौशम मे यहा पर घने बादल के कारण यह जगह स्वॅग जेसी लगती है। चारो तरफ हरयाली के साथ साथ पहाडॉ से गिरते झरने का यह नजारा कही ओर आपको नही देखने कोे मिलेगा ।

बीबी का मकबरा ( Bibi ka Maqbara ) मिनी ताजमहल

भारत का दुसरा ताजमहल ओर दख्खण के ताजमहल से जाने जाला वाला यह स्मारक ताजमहल की ही प्रतिकृति हे जो ताजमहल से छोटा ओर ताजमहल के जेसे ही आकार मे बनाया गया हे । 

यह स्मारक महाराष्ट्र के ओरंगाबाद जिल्ले मे स्थित हे , इस स्मारक का निमॉण ओरंगझेब के बेटे आजमशाह ने अपनी मां की याद मे सन 1651 - 1661 मे करवाया था । ताजमहल की तरह ही दिखने वाला यह स्मारक ताजमहल को देखकर प्रेरित होकर ही बनाया गया था । ताजमहल से इस की तुलना की जाये तो ताजमहल पुरा सफेद संगेमरमर से बनाया गया हे जब की इस स्मारक का मुख्य डोम को संगेमरमर से ओर बाकी सब प्लास्टर से बना हे जिसे यह ताजमहल की तरह ही लगता हेै। ताजमहल के साथ तुलना के कारण ही यह मकबरा यहा का मुख्य आकषण् बना हे , इस के साथ ही यहा पर चारो तरफ का नजारा भी ताजमहल की तरह लगता हे तो आप यहा जायेगे तो आप को एसा लगेगा जेसे आप ताजमहल के ही देख रहे हो ।

त्र्यम्बकेश्वर ( Trimbakeshwar  )

 त्र्यम्बकेश्वर यह भगवान शिव के बारह (12)  पवित्र ज्योतिलिंगो मे से एक हे ओर  यही पास से बृह्मगिरि नामक पवॅत से  गोदावरी नदी का उदगम स्थान भी हे ।  त्र्यम्बकेश्वर के इस ज्योतिॅलीग की खाश बात यह हे की यहा पर भगवान शिव के तीन मुख ( ब्रृह्मा , विष्णु ओर महेश )  है ।

 पौराणीक कथा अनुसार महषिॅ गौतम ओर गोदावरी के प्राथना के कारण भगवान शिव यहा विराजीत हुए ओर त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिॅलिग के नाम से जाने जाले वाले लगे। दशॅनीय स्थल के साथ साथ यहा का मौशम भी ठंडा हे जीसकी वजह से स्थल सौदयॅ से भरा पडा है।

माथेरान हिल स्टेशन ( Matheran hill station )         


 माथेरान महाराष्ट्र का एक छोटा सा लेकीन बहुत ही खुबसुरत हिलस्टेशन हे, यहा की सुंदरता के साथ साथ घाटीले रास्तो के लिये भी ये जाना जाता हे । यहा पर चारो तरफ फेली हरयाली , पहाडियॉ , चारो तरफ से गीते हुए जलप्रात का नजारा ओर पहाडो पर छाये हुए बादल हर कीसी का दिल खुश कर देने वाला हे । 

यहा पर बहुत सारे व्युह पोंइन्ट भी मोजुद हे जहा से चारो तरफ का अदभुत नजारा देखा जा सकता है।  इस के अलावा यहा पर किसी भी प्रकार के वाहन को ले जाने की मनाइ हे जिसके चलते यह प्रदुषण से मुक्त ओर बहोत ही शांत हिलस्टेशन हे । अपनी अदभूत सौदयॅता के साथ-साथ बहुत शांत ओर प्रदुषण मुक्त यह हिल स्टेशन हर कीसी को मनमग्न कर देने वाला हे ।

इस हिल स्टेशन को देखने के लिये बेस्ट समय अक्टुबर से डिसम्बर हे जब यह पुरी तरह से हरा भरा रहता है। 

सप्तसृंगी देवी वनी  ( Saptasrungi devi Vani )

            
माताजी के सुप्रसिद्व शक्तीपीठो मे से एक यह यात्राधाम अधॅशक्ती पीठ कहलाता हे , जो महाराष्ट्र के नाशिक से 65 km की दुरी पर संप्तसृंगी पवॅत पर विराजीत हे , यह तिथॅस्थल छोटे छोटे सात पवॅतो से घिरा हुअा हे जिसे इसे संप्तसृगी के नाम से जाना जाता है। प्रसिद्व तीॅथस्थल के साथ साथ यहा एक तरफ पथ्थर की पहीडी ओर खाइॅ ओर दुसरी तरफ हरयाली से घिरा यह स्थल बहुत ही सौदयॅ से भरा है।

यहा की प्राकृतिक सौदयॅ के साथ साथ इस स्थल का धामिॅक महत्व भी बहूत ही इसी लिये यहा पर साल भर भींड लगी रहती है।

रायगढ किला ( Raigad fort )

महाराष्ट्र के रायगढ जिले मे स्थित यह किला भारत के सबसे उचाई पर स्थित किलो मे शामिल हे । जो तकरीबन 1356 m की उचाई पर स्थित है। ईतनी उचाइ के कारण यह किला ट्रकीग के लिये मशहुर हे । इस किले पर चडने के लिये 1700 से भी ज्यादा सीडीयॉ बनायी गइ है । रोमाचंक सफर के साथ साथ इस इस किले के उपर से एक झील भी बहती हे जीसकी सौदयॅता हर किसी को मन मोहित करने वाली हे । मौनसुन के बाद यह हराभरा हो जाता हे , ओर इसके चारोतरफ का नजारा मन लभानेवाला होता है।

यह किला अपनी सौदयॅता , वास्तुकला ओर ट्रेकीग के लिये विश्व विख्यात हे ओर हर किसी को अपनी ओर खीचता है।

राजमाची किला  ( Rajmachi fort )

 रायगढ की तरह ही राजमाची का यह किला ट्रेकिग ( Trekking ) के लिये बहूत ही प्रखयात है। इस के साथ यहा की सौदयॅतॉ , चारो तरफ खाईया ओर उचे पहाडो से गिरते हुए झरने ने यहा की सौदयॅता को भर दिया हे । यहा की सौदयॅता हर कीसी को मौहित करने वाली है।
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