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GOLDEN TEMPLE OF AMRITSAR

GOLDEN TEMPLE AMRITSAR  सुवर्ण मंदिर अमृतसर

पंजाब के अमृतसर शहर में स्थित गोल्डन टेम्पल अपनी सौन्दर्यता के साथ साथ धार्मिक महत्व और भव्यता के कारण पूरी दुनिया के पर्यटकों को हरदिन यहा खिंचता रहता है। प्रतिवर्ष पूरी दुनिया से लाखों लोग इस GOLDEN TEMPLE में दर्शन करने और इसकी खूबसूरती को निहारने आते है। इस गोल्डन टेम्पल की खूबसूरती , भव्यता ओर प्रसिद्धि का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है , की भारत मे ताजमहल के बाद सबसे ज्यादा लोग अमृतसर के इस गोल्डन टेम्पल को ही देखने आते है।

            Photo credit pixabay.com


भारत का यह रंगबेरंगी , खुशियों से लहराता ओर हर दम मस्ती में झूमता राज्य गोल्डन टेम्पल जैसे प्रसिद्ध मंदिर के अलावा भी अपने चटपटे ओर मसालेदार खानपान , अपने पहनावे , प्रसिद्ध स्थलों के साथ साथ अपनी भाषा , भांगड़ा जैसे नाच गान के कारण भी लोगो को आकर्षित करता रहता है।

GOLDEN TEMPLE KISNE OR KAB BANAVAYA , सुवर्ण मंदिर किसने ओर कब बनवाया

अमृतसर में स्थित शीख सम्प्रदाय के इस  गुरुद्वारा का बाहरी भाग सोने से बनाया गया है । जिसके कारण इसे सुवर्ण मंदिर ( GOLDEN TEMPLE  ) कहा जाता है । अमृतसर के इस सुवर्ण मंदिर के निर्माण की शुरुआत 1570 में शुरू हुआ था । और इस मंदिर के निर्माण के लिए गुरु रामदासजी ने 500 बीघा ज़मीन को दान किया था ।जिसके कारण यहा इस मंदिर का निर्माण हो सका है । सुवर्ण मंदिर की वास्तुकला के रचनाकार शीख धर्म के प्रथम गुरु नानक ओर पांचवे गुरु अर्जुन साहिब ने ही किया था । इसके अलावा इस गुरुद्वारे का निर्माण भी गुरु रामदासजी द्वारा किये गए पवित्र सरोवर अमृत सरोवर के बीच ही किया गया है । और इस गुरुद्वारे के चारो ओर अमृतसर शहर बसा है ।

GOLDEN TEMPLE AMRITSAR KI VISHESHATA , सुवर्ण मंदिर अमृतसर की विशेषता ।

शीख धर्म के इस पवित्र गुरुद्वारे का निर्माण कुछ इस तरह से किया गया है , की इसके अंदर जाने के लिए चारो दिशाओ में दरवाजे बनवाये गए है । और इस गुरुद्वारे में जाने के लिए किसी भी धर्म से जुड़े लोग आ सकते है।

कहा जाता है ,  की इस गोल्डन टेम्पल के बाहरी हिस्से को 750 kg सोने की परतों से ढका गया है। जिससे यह आज भी अपनी खूबसूरती टिकाए हुए है ।

शीख धर्म के इस गुरुद्वारे को आक्रमणकारियो द्वारा कई बार तोड़ा गया है , पर शीख धर्म से जुड़े लोगों को अपने धर्म के प्रति श्रद्धा और आस्था की वजह से इसे जितनी बार तोड़ा गया , उतनी बार इसे फिरसे खड़ा किया गया है।

GOLDEN TEMPLE KI VISHV PRASIDDH LUNGAR , सुवर्ण मंदिर की विश्व प्रसिद्ध लंगर

अमृतसर शहर अपने विश्व प्रसिद्ध सुवर्ण मंदिर के प्रति श्रद्धा , आस्था  ओर सौन्दर्यता के साथ साथ अपनी विश्व प्रसिद्ध लंगर के लिए भी जाना जाता है। क्योंकि यह दुनिया की सबसे बड़ी लंगर है , जहा प्रति दिन 1 लाख से ज्यादा लोगो को मुफ्त में शुद्ध शाकाहारी खाना खिलाया जाता है । विश्व की इस सबसे बड़ी लंगर को चलाने के लिए दान में जो पैसे मिलते है , उसी से यह सब चलाया जाता है । इस लंगर में कोई भी व्यक्ति चाहे वह किसी भी धर्म से जुड़ा हो ,  वह यहा आकर मुफ्त में खाना खा कर जा सकता है। इस लंगर में त्योहार के दिनों या किसी खास दिनों में लोगो की भीड़ 4 लाख से ज्यादा भी हो जाती है , फिरभी उन्हें भरपेट खाना मिलता है।

गुरुद्वारे की इतनी बड़ी लंगर को चलाने के लिए प्रतिदिन 8000 kg से ज्यादा गेहू का आटा , 1200 kg से ज्यादा चावल के साथ साथ सब्जियों , दाल को भी 1000 kg से ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है।

इतनी बड़ी लंगर को रोटी खिलाने के लिए यहा मशीनों के साथ साथ महिलाएं भी अपना हाथ बटाती है , जिससे हर मशीन एक घंटे में लगभग 4 हजार रोटियां बनाती है , तो वही महिलाएं भी हर घंटे 2 हजार से ज्यादा रोटियां बनाती है।

शीख धर्म के इस गुरुद्वारे में इतने ज्यादा लोगो को खाना खिलाने के बावजूद भी साफ सफाई का काफी ख्याल रखा जाता है , क्योकि यहा पर  हर बर्तन को तीन बार अच्छी तरह से धोया जाता है।

शीख धर्म का यह पवित्र स्थान सुवर्ण मंदिर और इसकी यह प्रसिद्ध लंगर दुनिया को सर्वधर्म समभाव ओर एकता के सूत्र से जोड़ने में अपनी अहम भूमिका निभाता है। जो सब धर्मों के भेद भुलाकर अपने शरण मे आये हर व्यक्ति के लिए अपना दरवाजा खोल उसे भरपेट खाना खिलाता है।

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