HUBBLE TELESCOPE KE BARE ME JANKARI OR ISKE INTERESTING FACTS
हबल टेलिस्कोप एक खगोलीय उपग्रह है , जिसे 1990 में अमेरिका के डिस्कवरी स्पेसशटल से पृथ्वी की लॉव ऑर्बिट मे छोड़ा गया था । हबल टेलिस्कोप को बनाने में दुनिया की सर्वोच्च स्पेस एजेंसी NASA ने यूरोपियन स्पेस एजेंसी की मदद लेकर इसको तैयार किया था । हबल टेलिस्कोप को अंतरिक्ष मे लॉन्च करने की 1983 में ही योजना थी । पर उस साल इसमें कई तकनीकी खामियां देखने को मिली साथ ही बजेट अश्यू भी आये जिसके चलते इसको लॉन्च करने का काम 7 साल तक बढ़ गया और बाद में इसे 24 अप्रेल 1990 को लॉन्च किया गया ।
Photo credit pixabay.comपर हबल टेलिस्कोप के सफलतापूर्वक लॉन्च हो जाने के बाद जब इसने पहली बार इसके द्वारा खिंची गई तस्वीरे भेजी तो , तस्वीरो की क्वालिटी में कई खामियां नजर आयी । जिसका कारण इस टेलीस्कोप के मुख्य लेन्स को बहुत ही ज्यादा पोलिश कर दिया गया था । जिसके कारण यह दूरबीन अपनी पूरी क्षमता से काम नही कर पा रहा था । जिसको बिना ठीक किये यह टेलीस्कोप अच्छी तरह से काम नही कर शकता था। पर इस प्रॉब्लम को कैसे न कैसे तो ठीक करना ही था , इस लिए इसके लिए NASA के वैज्ञानिकों ने इस चुनोती को ठीक करने हेतु इसकी कक्षा में जाकर ही उसे वही पर ठीक करने का प्लान बनाया , इसके बाद एक विज्ञानिको की टीम को इसके सर्विस के लिए भेजा गया और उन्हों ने इस काम को भी सफलतापूर्वक कर दिया । जिसके चलते अब यह टेलीस्कोप पूरी तरह से काम करने लग गया था। इस हबल टेलीस्कोप का निर्माण में भी ऐसी तकनीक फ़ीट की गई है कि ईसे अवकाश में भी सर्विस किया जा शकता है , जिसके चलते इसे समय समय के अंतराल पर सर्विस किया जाता है ।
हबल टेलिस्कोप के निर्माण में मुख्य भूमिका अदा करने वाले वैज्ञानिक एडविन पॉवेल हबल रहे है , जो कि एक खगोलविज्ञानी रहे है । और उन्ही के नाम पर इसका नाम हबल टेलिस्कोप रखा गया है । आज हबल टेलिस्कोप अंतरिक्ष मे मौजूद सर्व श्रेस्ट वेधशाला ओ में से एक है ।
HUBBLE TELESCOPE KE INTERESTING FACTS , हबल टेलिस्कोप के इंटरेस्टिंग फैक्ट्स ।
◆ हबल टेलिस्कोप एक मात्र ऐसा टेलिस्कोप है जिसे इस तरह से तैयार किया गया है की इसे इसकी कक्षा मे जाकर भी वही पर सर्विस , ओर नई तकनीकों से उपग्रेट किया जा शकता है ।
◆ हबल टेलिस्कोप ने ही दुनिया को हमारी आकाशगंगा के केंद्र में मौजूद ब्लैक होल के बारे में अवगत कराया ।
◆ इसी हबल टेलिस्कोप की वजह से सन 2006 में प्लूटो के बारे में हमे ज्यादा जानकारी मील सकी , जिसके कारण उसे एक बौना ग्रह घोसित कर उसे ग्रह की उपाधि से निकला गया ।
◆ हबल टेलिस्कोप को धरती की सतह से 559 किलोमीटर की ऊंचाई पर पृथ्वी की low orbit में छोड़ा गया है ।
◆ हबल टेलिस्कोप की लंबाई 13.2 मीटर ओर इसका वजन 11,110 kg है , जिसमे 2.4 मीटर का ग्लास फीट किया गया है ,जिसे अलुमिनियम ओर मैग्नेशियम फ्लोराइड की परतों से ढका गया है।
◆ हबल टेलिस्कोप का नाम जिस भौतिक वैज्ञानिक के नाम पर रखा गया है , एडविन पॉवेल हबल इसी वैज्ञानिक ने सन 1920 में हमारे यूनिवर्स में अनगिनत आकाशगंगा ओ के होने की बात बताई ।
◆ हबल टेलिस्कोप की वजह से ही आज हम हमारी आकाशगंगा , ग्रहों , तारो ओर ब्रह्मांड के अन्य वस्तुओं के बारे में इतना ज्ञान मिल शका है , जिसकी वजह से 14 हजार से ज्यादा पब्लिशन प्रसारित किए है ।
◆ हबल टेलिस्कोप की वजह से ही हमारे ब्रह्मांड की सही आयु 13.7 अरब है , यह हम जान पाए है ।
◆ हबल टेलिस्कोप को अपनी एक परिक्रमा पूरी करने के लिए 95 - 97 मिनिट तक का समय लगता है , क्योकि इसकी गति 7500 मी. / सेकंड है । इस तरह यह प्रति दिन 14 - 15 चक्कर अपनी ऑर्बिट में लगा लेता है।
◆ हबल टेलिस्कोप के लक्ष्यों ओर किन चीजों पर अध्ययन और रिसर्च करना है , इन सब का चयन Space telescope science institute करता है ।
◆ गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर से इस हबल टेलिस्कोप को नियंत्रित किया जाता है ।
◆ हबल टेलिस्कोप ने हमारे ब्रह्मांड ओर इसमें मौजूद तारे , ग्रहों , ओर के खगोलीय पिंडो की 7 लाख से भी ज्यादा तस्वीरे हमारे पास भेज चुका है , जिससे आज हम ब्रह्मांड से जुड़े कई रहस्यों से पड़दा उठा पाए है ।
◆ हबल टेलिस्कोप की मदद से सबसे नजदीक वस्तु जिसको इसके द्वारा कैप्चर किया गया हो वह खगोलीय वस्तु हमारा चाँद है ।
◆ हबल टेलिस्कोप को बनाने से लेकर उसे लॉन्च करने में 1990 के दसके में भी 161 करोड़ डॉलर का खर्च हुआ था , ओर उसे आज के हिसाब से देखा जाए तो 300 करोड़ डोलर से ज्यादा हो जाये गा , पर यह रकम डोलर में है और इसे भारतीय रुपियो में गिना जाए तो 19 हजार करोड़ रुपये हो जायेगे ।
◆ साल 1990 में जब इसे लॉन्च लिया गया तब से लेकर आज 2020 तक इसपर 5 बार सर्विस के लिए मिशन किये गए है , जिसमे इसेमें कई आधुनिक उपकरणों को जोड़ा गया है ।
◆ हबल टेलिस्कोप दुनिया का सबसे महंगा टेलिस्कोप है , इसका कुल खर्चा $ 2.1 बिलियन है , ओर जब 2018 में इसमें नए आधुनिक टेक्निको से उपग्रेट किया गया तो यह रकम $ 8.3 बिलियन के पार पहुच गई ।
◆ साल 2021 के मार्च महीने में लॉन्च होने वाला जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप ( JAMES WEBB SPACE TELESCOPE ) नासा द्वारा लॉन्च होने वाला एक अत्यंत आधुनिक टेलिस्कोप होगा , जिसकी क्षमता हबल टेलिस्कोप के कई गुना ज्यादा होगी । जिसकी वजह से आधुनिक दुनिया के कई सवालों के जवाब ढूढ़ने में सहायता मिलेगी । और हमारे ब्रह्मांड के रहस्यों को शुलझा ने में मदद मिल सकेगी ।

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