हिन्दू धर्म मे गाय का महत्व और रोचक फैक्ट्स
हिन्दू धर्म मे गाय को माता के रूप में देखा जाता है , साथ ही हिन्दू धर्म मे गाय की पूजा भी की जाती है , ओर शायद भारतीय संस्कृति दुनिया की ऐसी पहली संस्कृति होगी जो गाय की पूजा और उसकी सेवा करने की संस्कृति रखती हो । आज हम हिन्दू धर्म के ग्रंथों में बताएं गए गाय से जुड़े ऐसे इंटरेस्टिंग बातों को जाने गे , जो हर हिन्दू धर्म से जुड़े हर व्यक्ति को इसका ज्ञान होना चाहिए , की आखिर हमारे धर्म मे गाय को इतना महत्व क्यो दिया जाता है ।
◆ हिन्दू धर्म के अनुसार गाय एक माता है , जिसकी सेवा करने पर अपने जीवन को सफल माना जाता है , साथ ही गाय की सेवा करने से अनेक सुख समृद्धि को पा शकने की बात कही गई है ।
◆ भगवान राम के वंश को अपने दिए हुए वचनों को पूरा करने के लिए जाना जाता है , इस वंश का मूल मंत्र भी यही था की " प्राण जाए पर वचन न जाये "। भगवान राम के पूर्वजो में से एक महाराजा दिलीप भी एक गाय की पूजा और सेवा करते होने की बात कही गई है । कहते है कि राजा दिलीप ने जीवनभर किसी भी हालत में नंदनी नामकी गाय की सेवा करने का वचन लिया था , जिसके कारण इसकी परीक्षा लेने भगवान ने खुद शेर का रूप लेकर दिलीप राजा की परीक्षा लेने आये , पर राजा दिलीप ने गाय के बदले अपने शरीर को दांव पर लगा दिया ।
◆ हिन्दू धर्म के 18 पुराणों में से एक पुराण गरुड़ पुराण में इस बात का उल्लेख किया गया है , की मनुष्य के मृत्यु के बाद उसे वेतरिणी नदी को पार कर गुजरना पड़ता है , ओर इस नदी को पार करने के लिए गाय के सहारे से ही पार किया जाता है , पर इसके लिए मनुष्य के अपने जीवनकाल मे किसी गाय की सेवा करने पर ही उस नदी को पार करने में गाय का सहयोग मिलता है ।
◆ हिन्दू धर्म के अनुसार गाय के शरीर मे कुल 33 प्रकार के देवी-देवता ओ के निवास करने की बात कही गई है । ओर साथ ही हिन्दू धर्म मे भी कुल 33 प्रकार के देवी-देवताओ के होने के बारे में कहा गया है । इसलिए हिन्दू धर्म मे उन 33 प्रकार के देवी-देवता ओ को अलग-अलग रूप में पूजने से बजाए सिर्फ एक गाय की सेवा ओर पूजा करने से सभी देवी देवता खुश होते है । इस लिए हिन्दू धर्म मे गाय की सेवा को बहुत महत्व बताया गया है ।
◆ शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव के सबसे पसंदीदा पत्र " बिलिपत्र " की उत्पत्ति भी गाय के गोबर से ही हुई थी ।
◆ हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान श्री कृष्ण को भी सारा ज्ञानकोष गाय के चरणों से ही प्राप्त हुआ था ।
◆ हिन्दू धर्म के परंपरा ओ में किसी मनुष्य के मरने के बाद कई रीति रिवाजों को किया जाता है , जिसमे से एक रिवाज ऐसा भी है , जिसमे मनुष्य के मरने के कुछ दिन बाद गाय के बछड़े की पूजा की जाती है , ओर बछड़े की पूछ को अपने माथे पर लगाकर उस व्यक्ति के लिए प्राथना की जाती है ।
◆ हिन्दू धर्म के संस्करों में से एक पितृश्राद्ध में भी गाय के दूध में बनवाया गया खीर को पितृओ को अर्पित किया जाता है । क्योंकि इसे पितृओ की हर तृप्ति को पूरी होने की बात कही गई है ।
◆ हिन्दू धर्म के प्राचीन ग्रंथ ऋग्वेद , अथर्ववेद ओर यजुर्वेद में भी गाय को सबसे पवित्र , सर्व सुखों को देने वाली , ओर संपति को घर मे लाने वाली कहा गया है ।
आज इस धरती पर गाय को सिर्फ अपने मतलब के लिए उपयोग किया जा रहा है , जहा गाय को खुले सड़को पर छोड़ दिया जाता है , ओर जरूरत पड़ने पर इसे वापस घर लाया जाता है , ओर ऐसा ज्यादातर भारत के छोटे-बड़े शहरों में ही देखने को मिलता है , गांव में तो आज भी गायों की पूजा और सेवा की जाती है । इस तरह अब गांव में ही हिन्दू धर्म से जुड़ी इस पवित्र गाय को माता का सम्मान मिलता है । वही आज गाय के दूध से बनी कई चीजें जैसे पनीर , आइसक्रीम , दही , छास तो हर कोई खाना चाहता है , पर गाय को कोई मनुष्य पालना नही चाहता ।

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